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Kabir ki Goonj

by Sureshpatel | 10-Sep-2025

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 “Kabir ki Goonj”Kabir’s voice has echoed from village paths to global arenas for centuries. In today’s world—where religion and knowledge often turn into commodities, and hatred and blind faith dominate—Kabir’s philosophy offers a powerful p...
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Book Details

  • Language : Hindi
  • Pages : 365
  • ISBN : 9789367838426
  • Genre: POETRY
  • Size : 5" x 8"
  • Binding Type : PAPERBACK
  • Age Group: + Years
  • Paper Type : WHITE PAPER
  • Interior : BLACK & WHITE
  • Cover : MATTE FINISH
  • Book Type : PAPERBACK
  • Tags : Kabir,Prahlad Singh Tipanya,Kabir Bhajan,Kabir in modern time,Kabir hindi poetry and literature,Kabir jan vikas samooh,Kabir yatra
  • Best Sellers Rank :
    #2099 in Poetry
    #11043 in Global

Reviews

  • Sureshpatel

    23-10-2025

    Kabir kee goonj ek behatreen pustak hai jismen kabir kee sampoorn samajh banti hai. Kabir ka pramanik parichy, samay, evam jaroorat, sagun nirgun interviw aur bahut kuch khaskar kabir ke padon ka hindi arth jaroor padhi jana chahiye Ashok dubey roopankan Indore 22 october 2025

  • Suryansh Patel

    11-11-2025

    आज के अधिकांश लेखकों से भिन्न, जो प्रायः सीमित विषयों और रूढ़ बिंबों में उलझे रहते हैं, डॉ. सुरेश पटेल लिखते हैं कि ‘कबीर की गूंज’ हमारे समय में विचार और संवेदना की एक अलग ही जमीन पर खड़ी है। यह पुस्तक कबीर को मात्र भक्ति कवि या संत के रूप में नहीं, बल्कि ऐसे समाज सुधारक, चिंतक और मानवीय चेतना के प्रतिनिधि के रूप में प्रस्तुत करती है, जिनकी प्रासंगिकता हर युग में बनी रहती है। कबीर की साखियाँ सरल और सहज हैं, किंतु उनमें निहित दृष्टि असाधारण और गहन है—वे हमें भीतर झाँकने, अपनी आत्मा से संवाद करने और सत्य की खोज को जीवन का केंद्र बनाने के लिए प्रेरित करती हैं। पुस्तक में कबीरपंथ की परंपरा, विवेकदास जी के अभियान, टेगर गाँव से आरंभ हुए सामाजिक-सांस्कृतिक आंदोलन, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और नशा मुक्ति जैसे व्यापक मुद्दों का उल्लेख है, तो दूसरी ओर मालवा की लोकधारा में पद्मश्री प्रहलाद सिंह टिपानिया द्वारा कबीर की गूंज को दी गई जीवन्तता का भी मार्मिक विवेचन है। विशेष महत्व यह भी है कि कबीर की वाणी कैसे मौखिक परंपरा के रूप में पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित रही और अमेरिकी विदुषी लिंडा हेस तक ने इसके वैश्विक महत्व को रेखांकित किया। यह पुस्तक हमें बताती है कि कबीर केवल अतीत की धरोहर नहीं हैं, बल्कि आज के समाज में व्याप्त पाखंड, अंधविश्वास और विभाजनकारी प्रवृत्तियों के विरुद्ध भी वे एक सशक्त हस्तक्षेप हैं। लेखक ने सहज, आत्मीय और संवेदनशील भाषा में यह दिखाया है कि कबीर का प्रेम, समानता और मानवता का संदेश किसी ग्रंथ तक सीमित नहीं, बल्कि हमारे जीवन, समाज और संस्कृति को बदलने की प्रेरणा है। इसीलिए ‘कबीर की गूंज’ पढ़ते हुए हमें बार-बार यह अनुभव होता है कि कबीर आज भी हमारे साथ हैं—हमारी जिज्ञासाओं, आकांक्षाओं और संघर्षों के बीच खड़े होकर यह स्मरण कराते हुए कि जीवन की असली खोज भीतर है और यही खोज मनुष्य को मनुष्य बनाती है।” - राकेश यादव (घुमंतू राहगीर)